झोपड़ी में रहने वालों को सालाना 4800 से 31,500 रुपये तक प्रॉपर्टी टैक्स भरना पड़ सकता है। अहमदाबाद की तर्ज पर लागू होने वाले इस टैक्स के लिए बीएमसी ने अपने कानून में सुधार किया है।
झोपड़ावासियों से प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने के लिए बीएमसी ने जल्दी ही सारी झोपड़पट्टियों का सर्वेक्षण करने की तैयारी की है। इससे संबंधित प्रस्ताव बीएमसी लॉ समिति की बैठक में जल्दी ही मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। बीएमसी में शिवसेना की सहयोगी पार्टी बीजेपी ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। बीजेपी नगरसेवक ज्ञानमूर्ति शर्मा ने बताया कि बीएमसी ने झोपड़पट्टियों पर अनायास ही टैक्स लगाने की तैयारी की है, लेकिन झोपड़ावासियों को किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं दी जा रही है। इनलोगों को पानी व टॉइलट की गंभीर समस्या से गुजरना पड़ रहा है। इनसे टैक्स वसूलने से पहले इन्हें सारी सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए।
गौरतलब है कि बीएमसी द्वारा पहले झोपड़पट्टियों से 'सेवा टैक्स' के तौर पर निवासी झोपड़ों से हर महीने 100 रुपये और अनधिकृत झोपड़ों से 250 रुपये टैक्स वसूला जाता था, लेकिन 2007 से ही 'सेवा टैक्स' को बंद कर दिया गया, उसके उपरांत प्रॉपर्टी टैक्स लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए बीएमसी ने पिछले साल 2014 में एक समिति का गठन किया था। इस समिति ने झोपड़पट्टियों को प्रॉपर्टी टैक्स रेडीरेकनर के अनुसार न लगाते हुए अहमदाबाद की तर्ज पर झोपड़पट्टियों के स्क्वेयर फीट व इस्तेमाल के अनुसार एक तय राशि को लागू करने की सिफारिश की है। इस कारण बीएमसी प्रशासन ने झोपड़ावासियों से प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने का निर्णय लिया है।
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